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देवी माता का अनोखा मंदिर, जहां चोरी करने पर ही मनोकामनाएं होती है पूरी

हमको बचपन से ही इसी बात की शिक्षा दी जाती है कि कोई भी बुरा काम नहीं करना चाहिए अन्यथा उसका बुरा परिणाम होता है अगर बात चोरी करने की आए तो चोरी करना पाप माना गया है यदि कोई व्यक्ति चोरी करता है तो उसका दंड उसको अवश्य मिलता है अगर किसी मंदिर में चोरी करने की बात हो तो यह महापाप माना जाता है परंतु आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में जानकारी देने वाले हैं जिस मंदिर के अंदर चोरी करने पर ही मनोकामनाएं पूरी होती है जी हां, आप बिल्कुल सही सुन रहे हैं आप लोग यह जानकर थोड़े आश्चर्यचकित अवश्य हो गए होंगे और आप लोगों के मन में यही विचार आ रहा होगा कि चोरी करना तो बुरी बात है अगर मंदिर में चोरी किया जाए तो भगवान मनोकामना कैसे पूरी कर सकते हैं? तो चलिए जानते हैं इस अनोखे मंदिर के बारे में।

ऐसा कहा जाता है कि चोरी करना पाप है और मंदिर में चोरी करना महापाप होता है परंतु एक ऐसा मंदिर मौजूद है जहां पर चोरी करने वाले लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती है हम जिस मंदिर के बारे में बात कर रहे हैं यह मंदिर देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड में मौजूद है वैसे इस स्थान में कई प्राचीन मंदिर है और इन्हीं प्राचीन मंदिरों में से एक अनोखा मंदिर है सिद्धपीठ चूड़ामणि देवी मंदिर, मान्यता अनुसार यहां चोरी करने पर ही व्यक्ति की मनोकामना पूरी होती है रुड़की के चुड़ियाला गांव में स्थित प्राचीन सिद्धपीठ चूड़ामणि देवी मंदिर में जिन व्यक्तियों को पुत्र प्राप्ति की इच्छा होती है वहां पर पति पत्नी माथा टेकने जाते हैं।

इस मंदिर के बारे में ऐसा बताया जाता है कि जिन शादीशुदा दंपति को पुत्र की चाहत होती है अगर वह इस मंदिर में आकर माता के चरणों में लकड़ी का गुड्डा चोरी करके अपने साथ ले जाए तो उसको पुत्र की प्राप्ति होती है उसके पश्चात बेटे के साथ माता-पिता को यहां माथा टेकने आना पड़ता है ऐसा बताया जाता है कि पुत्र होने पर भंडारा कराने के साथ ही दंपति आषाढ़ माह में ले जाए हुए लकड़ी के गुड्डा के साथ एक अन्य लकड़ी का गुड्डा भी अपने पुत्र के हाथों से अर्पित करवाते हैं यहां के स्थानीय लोगों का ऐसा कहना है कि इस मंदिर का निर्माण 1805 में लंढोरा रियासत के राजा ने करवाया था।

इस मंदिर के बारे में ऐसी कहानी बताई जाती है कि कई साल पहले एक राजा हुआ करता था जिसकी कोई संतान नहीं थी एक दिन वह इस मंदिर के जंगल में शिकार करने आया जहां उसे मां की पिंडी के दर्शन हुए थे इसके दर्शन करने के बाद उसने पुत्र की कामना की और इसके कुछ ही दिन बाद उन्हें पुत्र की प्राप्ति हो गई थी इसके बाद ही राजा ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था जिस स्थान पर यह भव्य मंदिर बना हुआ है यहां पर पहले घना जंगल हुआ करता था जहां से शेरों की दहाड़ने की आवाज सुनाई पड़ती थी  इस मंदिर में दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं इस मंदिर में भव्य मेले का आयोजन भी होता है।