HomeUncategorizedशमशान भूमि पर बना माता का चमत्कारिक मंदिर, जहां दर्शन मात्र से...

शमशान भूमि पर बना माता का चमत्कारिक मंदिर, जहां दर्शन मात्र से ही होती है मुरादे पूरी

ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त माता को अपने सच्चे मन से याद करता है माता उसकी पुकार सुनकर अवश्य आती है वैसे देखा जाए तो माता का दिल बहुत ही कोमल होता है और यह अपने बच्चों को कभी भी परेशानी नहीं देख सकती हैं इसीलिए तो जो भक्त अपनी श्रद्धा और सच्चे मन से माता को पुकारता है माता उसके सभी कष्ट दूर करने के लिए जरूर आती है, आज हम आपको एक ऐसे चमत्कारिक मंदिर के बारे में जानकारी देने वाले हैं जहां पर माता रानी अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती है दरअसल, हम जिस मंदिर के बारे में बात कर रहे हैं यह मंदिर बिहार के दरभंगा शहर में चिता पर बना मंदिर है इस जगह से भक्तों की काफी आस्था जुड़ी हुई है यह जगह आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है दरभंगा राज परिवार के महाराज रामेश्वर सिंह की चिता पर शमशान भूमि पर बना मंदिर श्यामा माई के नाम से प्रसिद्ध है यहां पर भक्त अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए माता के दरबार में आते हैं वैसे देखा जाए तो माता के इस मंदिर में पूरे वर्ष भर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है परंतु नवरात्रों के दिनों में यहां सबसे ज्यादा भीड़ होती है इस मंदिर के अंदर माता काली की भव्य प्रतिमा स्थापित है।

देवी माता के इस मंदिर के बारे में यहां के स्थानीय लोगों का ऐसा कहना है कि जो भक्त मां काली से नम आंखों से कुछ भी मांगता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं माता अवश्य पूरी करती है भक्तों को मां श्यामा माई के दर्शन से ही एक अद्भुत सुख की प्राप्ति हो जाती है इस मंदिर के अंदर माता एक श्मशान भूमि पर विराजमान है माता के दरबार में लोग अपनी मनोकामनाएं तो पूरी करते ही हैं इसके अतिरिक्त यहां पर शुभ कार्य जैसे मुंडन मांगलिक कार्य भी होते हैं ऐसा माना जाता है कि किसी के शुभ कार्य जैसे मुंडन शादी विवाह होने के पश्चात अगले 1 साल तक ना तो उसे किसी के दाह संस्कार में भाग लेना चाहिए और ना ही किसी के श्राद्ध का खाना खाना चाहिए इस मंदिर के अंदर वर्षभर धार्मिक कार्यक्रम और अनुष्ठान होते रहते हैं।

ऐसा बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना दरभंगा के महाराजा कामेश्वर सिंह ने 1933 में करवाई थी इस मंदिर के अंदर माता श्यामा की विशाल मूर्ति भगवान शिव की जांघ और वक्षस्थल पर है माता काली की दाहिनी तरफ महाकाल और बाएं तरफ भगवान गणेश जी और बटुक की प्रतिमाएं मौजूद है मां श्यामा माई के मंदिर में आरती का विशेष महत्व है माता की आरती में शामिल होने के लिए भक्त यहां पर कई कई घंटों इंतजार में लगे रहते हैं क्योंकि ऐसा माना गया है कि माता की आरती में जो साक्षी बन जाता है उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती है और उसके जीवन के सभी कष्ट और अंधकार दूर होते हैं।

इस मंदिर के प्रति लोगों के अंदर अटूट विश्वास देखने को मिलता है इस मंदिर में माता श्यामा की पूजा तांत्रिक और वैदिक दोनों ही रूप से की जाती है वैसे हिंदू धर्म में शादी के एक साल बाद तक शादीशुदा जोड़ा श्मशान भूमि में नहीं जाता है परंतु शमशान भूमि में बने इस मंदिर में ना केवल नवविवाहित आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं बल्कि इस मंदिर के अंदर शादियां भी होती है जानकारों का ऐसा बताना है कि श्यामा माई माता सीता का ही रूप है।