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11 मुखी हनुमान जी के हैं बहुत खास मायने, जानिए कौन से हनुमान जी करेंगे आप की मनोकामना पूरी

हिंदू धर्म में हनुमान जी की बहुत मान्यताएं हैं और उनकी पूजा हर कोई करता है. ऐसा माना जाता है कि हनुमान जी आज भी हैं और अपने भक्तों के लिए हमेशा खड़े रहते हैं उनकी रक्षा बुराईयों से करते हैं. अगर आप हनुमान जी की पूजा मंगलवार के दिन पूरी श्रद्धा के साथ करते हैं तो आपको मनवांछित फल मिलता है लेकिन अगर आपने 11 मुखी हनुमान जी की पूजा कर ली तो फिर आपके जीवन में सुख-समृद्धि निश्चित रूप से मिलता है. 11 मुखी हनुमान जी के हैं बहुत खास मायने, आपको इनकी हर मूर्ति से क्या मनोकमानाएं मांगनी चाहिए इसके बारे में जानना चाहिए.

11 मुखी हनुमान जी के हैं बहुत खास मायने

हनुमान जी कि शक्तियां जब 11 मुखी हनुमान जी के साथ जुड़ जाती हैं तो ये चमत्कारिक रूप से बढ़ती हैं. भक्त हनुमान जी से एक साथ कई आर्शीवाद पाने की इच्छा रखने वालों को उनकी 11 मुखी हनुमान जी की पूजा जरूर करनी चाहिए. भगवान की पूजा करने से एक साथ कई मनोकामनाओं की पूर्ति होती है, हालांकि 11 मुखी हनुमान जी की मूर्ति या मंदिर हर जगह आसानी से नहीं मिलती क्योकि हर जगह एक मुखी हनुमान जी ही होते हैं. एक मुखी के बात 5 मुखी हनुमान जी की प्रतिमा भी पाई जाती है लेकिन 11 मुखी तो आसानी से नहीं मिलती लेकिन अगर मिल जाए तो आपको उनकी पूजा जरूर करनी चाहिए.

पूर्वमुखी हुनमान जी

पूर्व की तरफ मुख वाले बजरंबली को वानर रूप में पूजा जाता है. इस रूप में भगवान को बेहद शक्तिशाली और करोड़ों सूर्य के तेज के समान बताया गया है शत्रुओं के नाश के बजरंगबली कहे जाते हैं. दुश्मन अगर आप पर हावी हो रहे तो पूर्वमूखी हनुमान की पूजा करनी चाहिए.

पश्चिममुखी हनुमान जी

पश्चिम की तरफ मुख वाले हनुमानजी को गरूड़ का रूप मानते हैं. इसी रूप संकटमोचन का स्वरूप माना गया है और ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु का वाहन गरुड़ अमर है उसी के समान बजरंगबली भी अमर हैं. यही कारण है कि कलयुग के जाग्रत देवताओं में बजरंगबली को माना जाता है.

उत्तरामुखी हनुमान जी

उत्तर दिशा की तरफ मुख वाले हनुमान जी की पूजा शूकर के रूप में की जाती है. एक बात और वह यह कि उत्तर दिशा यानी ईशान कोण देवताओं की दिशा मानी जाती है और यह मंगलकारी होता है. इस दिशा में स्थापित बजरंगबली की पूजा से इंसान की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है और इस ओर मुख किए भगवान की पूजा आपको धन-दौलत, ऐश्वर्य, प्रतिष्ठा, लंबी आयु के साथ ही रोगमुक्त कर देती है.

दक्षिणामुखी हनुमान जी

दक्षिण मुखी हनुमान जी को भगवान नृसिंह का रूप माना जाता है. दक्षिण दिशा यमराज की होती है और इस दिशा में हनुमान जी की पूजा से इंसान के डर, चिंता और दिक्कतों से मुक्ति मिल जाती है और दक्षिणमुखी हनुमान जी बुरी शक्तियों से बचता है.

ऊर्ध्वमुख

इस ओर मुख किए हनुमान जी को ऊर्ध्वमुख रूप यानी घोड़े का रूप माना जाता है. इसी रूप की पूजा करने वालों को दुश्मनों और संकटों से मुक्ति मिलती है और इस स्वरूप को भगवान ने ब्रह्माजी के कहने पर धारण कर हयग्रीवदैत्य का संहार किया था.

पंचमुखी हनुमान

पंचमुखी हनुमान के पांच रूपों की पूजा करते हैं और इसमें हर मुख अलग-अलग शक्तियों का परिचायक होता है. रावण ने जब छल से राम लक्ष्मण बंधक बना लिया था तब हनुमान जी ने पंचमुखी हनुमान का रूप धारण करके अहिरावण से मुक्त कराया था. पांच दिये एक साथ बुझाने पर ही श्रीराम-लक्षमण मुक्त हो सकते थे इसलिए भगवान ने पंचमुखी रूप धारण किया. उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की तरफ हयग्रीव मुख एवं पूर्व दिशा में हनुमान मुख में विराजमान हैं.

एकादशी हनुमान

ये रूप भगवान शिव का स्वरूप भी माना जाता है और एकादशी रूप रुद्र यानी शिव का 11वां अवतार है. ग्यारह मुख वाले कालकारमुख के राक्षस का वध करने के लिए भगवान ने एकादश मुख का रुप धारण किया था. चैत्र पूर्णिमा यानी हनमान जयंती के दिन उस राक्षस का वध कर दिया था. यही कारण है कि भक्तों को एकादशी और पंचमुखी हनुमान जी पूजा सारे ही भगवानों की उपासना समना माना जाता है.

वीर हनुमान

हनुमान जी के इस स्वरूप की पूजा भक्त साहस और आत्मविश्वास पाने के लिए करते हें. इस रूप के जरिये भगवान के बल, साहस, पराक्रम के लिए विख्यात है इसका मतलब ये है कि भगवान श्रीराम के काज को संवार सकता है वह अपने भक्तों के हर काम और कष्ट को क्षण में दूर करते हैं.

भक्त हनुमान

भगवान का यह स्वरूप में श्रीरामभक्त के लिए है. इनकी पूजा करने से आपको भगवान श्रीराम का भी आर्शीवद मिलता है. बजरंगबली की पूजा अड़चनों को दूर करने वाली होती है और इस पूजा से भक्तों में एग्राता और भक्ति की भावना जागृत होती है.

दास हनुमान

बजरंबली का यह स्वरूप श्रीराम के प्रति उनकी भक्ति को दर्शाता है. इस स्वरूप की पूजा करने वाले भक्तों को धर्म कार्य और रिश्ते-नाते निभाने में निपुणता मिलती है. सेवा और समर्णण का भाव भक्त इस स्वरूप के जरिये ही हासिल करते हैं.

सूर्यमुखी हनुमान

यह स्वरूप भगवान सूर्य का माना जाता है. सूर्य देव बजरंगबली के गुरु माने जाते हैं और इस स्वरूप की पूजा से ज्ञान, प्रतिष्ठा, प्रसिद्धि और उन्नति का रास्ता खोलता है. क्योंकि श्रीहनुमान के गुरु सूर्य देव अपनी इन्हीं शक्तियों के लिए जाने जाते हैं.