आज से लेकर होली की रात तक भूल से भी न करें ये काम, वरना हो जाएगा अशुभ

ये तो हम सभी जानते हैं हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्‍योहार होली होता है और इस त्‍योहार से ही हिंदू नववर्ष की शुरूआत हो जाती है।  दरअसल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली मनाई जाती है और उससे आठ दिन पहले से ही होली की तैयारियों की शुरुआत को होलाष्टक के रूप में मनाया जाता है।

फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली मनाई जाती है और उससे आठ दिन पहले से ही होली की तैयारियों की शुरुआत को होलाष्टक के रूप में मनाया जाता है। चन्द्रमास के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका पर्व मनाया जाता है और इस होली पर्व के आने की सूचना होलाष्टक के द्वारा ही प्राप्त होती है। होलाष्टक को होली पर्व की सूचना लेकर आने वाला एक हराकर कहा जा सकता है। ‘होलाष्टक’ के शाब्दिक अर्थ पर जाएं तो इसका अर्थ होता है होला+अष्टक अर्थात होली से पूर्व के आठ दिन, जो दिन होता है, वह होलाष्टक कहलाता है।

सामान्य रुप से देखा जाये तो होली एक दिन का त्यौहार न होकर बल्कि पूरे नौ दिनों का त्यौहार है। धुलण्डी वाले दिन होलाष्टक समाप्त हो जाते हैं। वास्तव में होलाष्टक के पहले ही दिन होलिका दहन के लिये गली या मुहल्ले में होलिका दहन का स्थान निश्चित कर लिया जाता है और इस स्थान को गंगा जल आदि से पवित्र कर वहां लकड़ियां एकत्रित कर ली जाती हैं और वहां पर होली का डंडा स्थापित कर दिया जाता है।

होलाष्टक में अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहू उग्र रहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इन्‍हीं आठ दिनों में बालक प्रह्लाद की अनन्य नारायण भक्ति से नाराज हिरण्यकश्यप ने उनको अनेक प्रकार के कष्ट दिए थे और होलिका दहन वाले दिन उसको जीवित जलाने का प्रयास किया था, तभी से इन आठ दिनों को हिंदू धर्म में अशुभ माना जाता है।

धार्मिक ग्रंथों में होलाष्टक को लेकर कई सारी मान्यताएं हैं इनदिनों शुभ और मांगलिक कार्यों को वर्जित माना जाता है और ऐसी मान्यता है की होलिका से करीब 8 दिन पहले तक दाहकर्म की तैयारी की जाती है जो की मृत्यु का सूचक माना जाता है और इसी शोक के कारण होली से 8 दिन पहले तक कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। इतना ही नहीं कहा जाता है की यदि आप इस दौरान विवाह सम्बन्ध बनाते हैं तो विवाह आदि संबंध टूट जाते हैं और घर में क्लेश की स्थिति बनती है।

तो आज हम आपको बताते हैं कि ऐसे कौन कौन से काम हैं जो होलाष्टक के दौरान नहीं करने चाहिए।

हिंदू धर्म में इस दौरान बताए गए 16 संस्कारों बताए गए है जैसे गर्भाधान, विवाह, पुंसवन, गृह शांति, हवन यज्ञ कर्म, नामकरण, चूड़ाकरन, विद्यारम्भ, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, आदि नहीं किए जाते हैं। ऐसा इसीलिए किया जाता है क्योंकि होलाष्टक को ज्योतिष की दृष्टि से एक दोष माना जाता है, जिसमें शुभकाम करने की मनाही होती है।

होलाष्टक आरंभ होते ही दो डंडों को स्थापित किया जाता है। इसमें एक होलिका का प्रतीक है और दूसरा प्रह्लाद से संबंधित है।

होलिका दहन में जब प्रह्लाद बच जाता है तो उसी खुशी में होली का त्योहार मनाते हैं।

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