बुधवार के दिन इन पाँच नियमों से करें गणेश जी की पूजा, पूरी हो जाएँगी सभी मनोकामनाएँ

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का कितना महत्व है, यह बात सभी लोग जानते हैं। हिंदू धर्म में कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। लेकिन सबसे पहले और किसी काम की शुरुआत से पहले गणपति की पूजा की जाती है। गणपति को हिंदू देवताओं में प्रथम पूज्य माना जाता है। इनके बारे में कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति गणेश जी की पूजा के बाद किसी शुभ कार्य की शुरुआत करता है, उसे उस काम में सफलता ज़रूर मिलती है। इसी वजह से हर शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है।

बहुत जल्दी हो जाती है मनोकामनाएँ पूरी

गणेश की की पूजा से व्यक्ति ओ रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है। हिंदू धर्म में सभी देवी-देवताओं की पूजा के कुछ नियम बताए गए हैं। जो इन नियमों के अनुसार किसी भी देवी-देवता की पूजा करता है, उसकी मनोकामनाएँ बहुत जल्दी ही पूरी हो जाती हैं। सप्ताह के प्रत्येक दिन को किसी ना किसी देवी-देवता को समर्पित किया गया है। ठीक ऐसे ही बुधवार का दिन श्री गणेश को समर्पित है। शिवपुत्र गणेश की आराधना बुधवार के दिन ही की जाती है। श्री गणेश की ज़्यादातर पूजा माता लक्ष्मी के साथ ही जाती है।

श्री गणेश की पूजा से दूर हो जाता है शनि दोष

बुधवार के दिन बुध ग्रह की शांति के लिए भी पूजा की जाती है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह अशुभ स्थिति में है तो बुधवार को पूजा अर्चना करने से उसके सभी दोषों का अंत हो जाता है। इसके साथ ही यह भी मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से शनि जैसे कठिन ग्रह के साथ अन्य कई ग्रह दोष भी दूर हो जाते हैं। प्रत्येक बुधवार को श्री गणेश की उपासना करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। गणेश की की पूजा करते समय जो लोग इन पाँच नियमों का पालन करते हैं, उन्हें बहुत जल्दी सफलता मिलती है।

श्री गणेश की पूजा में रखें इन पाँच नियमों का ध्यान

सबसे पहले सुर्योदय के समय उठकर स्नान करें। इसके बाद श्री गणेश की प्रतिमा, ख़ासतौर से किसी धातु की प्रतिमा को लें और उसे मिट्टी या नींबू से अच्छे से साफ़ करें। इसके बाद प्रतिमा को पूजा वाली जगह पर पूर्व या उत्तर दिशा में मुँह करके लाल रंग के आसन पर स्थापित करें।

श्री गणेश की प्रतिमा को लाल कपड़े पर स्थापित करने के बाद ख़ुद भी श्री गणेश के सम्मुख किसी शुद्ध आसन पर बैठ जाएँ। अब श्री गणेश का ध्यान करते हुए पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौलि, लाल चंदन और श्री गणेश का सबसे प्रिय मोदक उन्हें अर्पित करें।

श्री गणेश की पूजा करते समय इस बात का ध्यान रखें कि श्री गणेश को तुलसी दल और तुलसी पत्र नहीं चढ़ाया जाता है। इसकी जगह उन्हें दुर्वा अर्पित किया जाता है। किसी शुद्ध जगह से दुर्वा लेकर उन्हें चढ़ाएँ और साथ में लाल पुष्प और पान का पत्ता अर्पित करें।

श्री गणेश की पूजा करते समय व्यक्ति को क्रोध से बचना चाहिए। अब श्री गणेश को पंचामृत अर्पित करें और उनकी आरती करें।

अब सबसे अंत में श्री गणेश का ध्यान करते हुए ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें। जो व्यक्ति प्रत्येक बुधवार को इसी तरह से श्री गणेश की पूजा करता है, उसे जीवन में ख़ूब सफलता मिलती है। ऐसे पूजा करने वाले को किसी चीज़ की कमी नहीं होती है।

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