एक बार दर्शन देने के बाद गायब हो जाता है यह मंदिर

हमारे भारत में तीर्थ स्थानों का जैसे कि बद्रीनाथ, केदारनाथ और वैष्णो देवी के खूब चर्चे होते हैं। गौरतलब है कि यह धार्मिक स्थल पौराणिक काल से ही भारत में मौजूद है। वहीं, इन तीर्थ स्थानों के अलावा क्या आपने कभी ऐसे किसी मंदिर के बारे में सुना है जो अपना जल अभिषेक खुद डुबकी मार कर करवाता है… क्यों चौंक गए ना???

आज वेद संसार आपको ऐसे ही एक अनोखे मंदिर के बारे में बताने जा रहा है, जो एक बार अपनी झलक दिखा कर वापिस लहरों में गायब हो जाता है –

दरअसल, इस दिव्य मंदिर की खोज 150 साल पहले की गई थी। जितनी पुरानी यह मंदिर है उतना ही दिलचस्प इस मंदिर के पीछे की कहानी है। यह कहानी प्राचीन काल में ताड़कासुर नाम के एक राक्षस की है, जिसने भगवान भोलेनाथ या यूं कहे कि शिव जी की कठोर तपस्या करके उन्हें खुश कर दिया था और वरदान भी हासिल कर लिया था। वरदान में राक्षस ताड़कासुर ने यह मांगा कि उसकी मृत्यु भगवान शिव के छह दिन के पुत्र द्वारा ही हो सके।

शिव पुत्र कार्तिके द्वारा हुई ताड़कासुर की मौत –

किसी ने सही कहा है कि किस्मत से ज्यादा अगर किसी को कुछ मिल जाए तो उसे उसकी अहमियत का पता नहीं चल पाता है और वह उसे व्यर्थ करने में जुट जाता है। ताड़कासुर को उसके मन अनुसार तो वरदान मिल गया, लेकिन वह अपने वरदान का गलत उपयोग करने लगा… घमंड से चुर ताड़कासुर हर जगह बुरी तरह अपना आंतक मचाने लगा था। ताड़कासुर के इस भयानक रूप को देख सभी देवी-देवता डर गए और सभी जन अपनी गुहार लेकर भगवान शिव जी के पास जा पहुंचे।

ऐसे में भगवान शिव ने अपनी शक्ति का उपयोग कर श्वेत पर्वत के पिंड से कार्तिके को जन्म दिया। बता दें कि कार्तिके के छह सर और चार आंखे थी। यही नहीं, कार्तिके के जन्म के बाद ही ताड़कासुर का आतंक उसके वध के साथ खत्म हुआ। वहीं, जब कार्तिके को इस बात की जानकारी मिली कि जिस ताड़कासुर का उसने वध किया है वह उन्हीं के पिता भगवान शिव का परम भक्त था, तो उन्हें बहुत आघात पहुंचा।

विश्व नदन स्थल की स्थापना –

ताड़कासुर के वध की जगह पर भगवान विष्णु ने विश्व नदन स्थल की स्थापना की थी, जिसे कार्तिके ने ही पूरा किया था। उसी वक्त से यह मंदिर काफी लोकप्रिय हो गाय। बता दें कि आज यह मंदिर स्तंभेश्वर तीर्थ के नाम से जानी जाती है। गुजरात में वडोदरा से 85 किमी दूर स्थित, जम्बूसर तहसील के कावी कम्बोई गांव में यह मंदिर है। ध्यान दें कि यह मंदिर अरब सागर के बीच कैम्बे तट पर स्थित है।

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