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इस मंदिर में मां संतोषी सभी मनोकामनाएं करती हैं पूरी, दूर-दूर से आशीर्वाद लेने आते हैं लोग

हमारे देश भर में माता रानी के बहुत से चमत्कारिक मंदिर मौजूद है और इन मंदिरों के प्रति लोगों का अटूट विश्वास देखने को मिलता है लेकिन आज हम आपको संतोषी माता के एक ऐसे मंदिर के बारे में जानकारी देने वाले हैं, जहां पर भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर दूर-दूर से आते हैं और माता का आशीर्वाद लेकर जाते हैं, जैसा कि आप लोग जानते हैं माता संतोषी की पूजा अर्चना और इनका व्रत करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है, माता संतोषी का शुक्रवार का दिन बहुत ही खास माना गया है और शुक्रवार के दिन बहुत से लोग ऐसे हैं जो मां संतोषी का व्रत करते हैं और माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करके अपनी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

आज हम आपको जिस मंदिर के बारे में जानकारी दे रहे हैं यह माता संतोषी का मंदिर राजस्थान के जोधपुर में स्थित है, यह मंदिर दुनियाभर में बहुत ही प्रसिद्ध है, इस मंदिर के अंदर लोग अपनी मनोकामना को पूरा करने के लिए दूर-दूर से आते हैं और मनोकामनाएं पूरी होने के पश्चात माता का आशीर्वाद लेकर जाते हैं, जोधपुर में स्थित मां संतोषी का यह प्रसिद्ध मंदिर शक्तिपीठ के रूप में जाना जाता है, इस मंदिर को प्रगट संतोषी मंदिर के नाम से लोग जानते हैं, इस मंदिर के अंदर माता संतोषी मूर्ति के रूप में साक्षात विराजमान है।

माता संतोषी के इस प्रसिद्ध मंदिर के अंदर भक्तों की लंबी लाइन लगी रहती है, लोग माता के दर्शन करने के लिए घंटों तक लाइन में खड़े रहते हैं, इस मंदिर के अंदर केवल राजस्थान के लोग ही नहीं बल्कि आसपास के राज्य के लोग भी दर्शन करने के लिए यहां पर मौजूद होते हैं, अगर आप इस मंदिर में कभी दर्शन करने के लिए आएंगे तो इस मंदिर की बनावट बहुत ही खास है, इस मंदिर को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे मुख्य गर्भ ग्रह की चट्टाने शेषनाग की भांति माता की मूर्ति पर छाया कर रही है।

माता के इस मंदिर में साल भर लोग दर्शन करने के लिए भारी संख्या में आते हैं परंतु जब नवरात्रि के दिन आते हैं तो यहां पर भक्तों की संख्या अधिक हो जाती है, इस मंदिर के आसपास के नजारे को देखकर लोग इसकी तरफ आकर्षित हो जाते हैं, इस मंदिर के आसपास लाल रंग की चट्टाने है, जब इन चट्टानों पर सूरज की किरणें पड़ती है तो यह पूरा क्षेत्र लाल रंग सा दिखाई देने लगता है, ऐसा लगता है कि जैसे माता रानी चुनरी फैलाकर यहां पर विराजमान हो, इस मंदिर के अंदर हवन-कीर्तन और अखंड ज्योत जलती रहती है, ऐसा माना जाता है कि जो भक्त अपनी दुख-परेशानियां और मनोकामना लेकर इस मंदिर में आता है उसको कभी भी मातारानी निराश नहीं जाने देती हैं।

इस मंदिर के बारे में ऐसा बताया जाता है कि इस मंदिर में एकमात्र माता संतोषी की प्रकट मूर्ति स्थापित है जिसकी वजह से लोगों की आस्था अधिक बढ़ गई है, इस मंदिर में माता को गुड़ और चने का प्रसाद अर्पित किया जाता है, इस मंदिर की विशेष बात यह है कि इसके विकास के लिए किसी भी प्रकार का लोगों से चंदा नहीं लिया जाता है यहां पर माता के चरण दर्शन कर सकते हैं, सर्दियों के समय में यह मंदिर सुबह 7:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुलता है और गर्मियों में सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुलता है।