जानें क्यों 19 वर्षों तक पीपल के पेड़ में उल्टा लटके रहे शनिदेव

शनिदेव के बारे में कहा जाता है कि ये व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल देते हैं। इसी वजह से इन्हें न्याय का देवता भी कहा जाता है। यह पदवी इन्हें भगवान शंकर से प्राप्त हुई है। देवी सवर्णा की कोख से कृष्ण ज्येष्ठ अमावस्या के दिन जन्में शनिदेव ने अपनी दृष्टि से पिता सूर्यदेव को कुष्टरोग दे दिया था। एक बार शनि-महेश युद्ध में महेश्वर ने इन्हें 19 सालों तक के लिए पीपल के पेड़ पर उल्टा लटका दिया था।

भगवान शंकर स्वयं आये शनिदेव से युद्ध करने:

सूर्यदेव ने अपने सभी पुत्रों को उनकी योग्यता के अनुसार विभिन्न लोकों का आधिपत्य दे दिया, इससे असंतुष्ट होकर शनिदेव ने दुसरे लोकों पर कब्ज़ा कर लिया। सूर्यदेव की आराधना पर भगवान शंकर ने अपने गणों को शनिदेव से युद्ध करके के लिए भेजा, लेकिन शनिदेव ने सभी को परास्त कर दिया। इसके बाद भगवान शंकर स्वयं शनिदेव से युद्ध करने आये। शनिदेव ने भगवान शंकर पर मारक दृष्टि डाली तो भगवन शंकर ने अपना तीसरा नेत्र खोलकर शनिदेव के अहंकार को तोड़ दिया।

सूर्यदेव ने पुत्र के लिए मांगा भगवान शंकर से जीवनदान:

शनिदेव को सबक सिखाने के लिए भगवान शंकर ने उन्हें 19 वर्षों तक पीपल के पेड़ से उल्टा लटका दिया। इन्ही 19 वर्षों के दौरान शनिदेव भगवान शंकर की उपासना करते रहे। यही वजह है कि शनि की महादशा 19 वर्षों की होती है। पुत्र की यह दशा देखकर सूर्यदेव ने भगवान शंकर से जीवनदान माँगा। इसके बाद भगवान शंकर ने शनिदेव को मुक्त कर दिया और उन्हें अपना शिष्य बनाकर उन्हें दंडाधिकारी नियुक्त कर दिया।

भगवान राम ने शनिदेव की वजह से ही काटा वनवास:

ब्रह्मवैवर्त पुराण की मानें तो शनिदेव की वजह से ही भगवान गणेश का सर कटा था और वह गजमुख कहलायें। विक्रमादित्य को शनिदेव के क्रोध के कारण की जीवन में कष्ट झेलने पड़े थे। राजा हरिश्चंद्र को भी शनिदेव की वजह से ही दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी थी। शनिदेव की वजह से ही राजा नल और रानी दमयंती ने जीवन में कष्ट भोगे। शानिदोष की वजह से ही भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ था और रावण के वंश का नाश हुआ था। पांडवों को भी जो कष्ट भोगने पड़े थे, उसका कारण शनिदेव ही थे।

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