नागमणि के पीछे का क्या है सच

ऐसा माना जाता है कि नागमणि अगर किसी के हाथ लग जाए, तो वह रातों रात अमीर बन जाता है और साथ ही उसकी सारी मांग चाहे वह पैसों की मांग हो या फिर घर की सभी पूरी हो जाती है। यह भी सच है कि आज तक किसी भी इंसान को नागमणि नहीं मिल पाई है।
नागमणि के पीछे की सच्चाई आज वेद संसार आपको बताने जा रहा है…

क्या है नागमणि?

बता दें कि नागमणि एक मोती के आकार की होती है। यह मोती जिन सांपों के पास मिलती है वो इंडोनेशिया और मलेशिया में पाया जाता है। जान लें कि इस खास मोती (पर्ल) को  कोबरा पर्ल और नेचुरल पर्ल के नाम से भी जाना जाता है। यही नहीं, इस पर्ल का आकर और डिजाईन बहुत कुछ फिश पर्ल से भी मिलता है।

वहीं, आपने कुछ कहानियों में भी यह सुना होगा कि नागमणि उन सांपों को ही मिलती है, जो 1000 सालों तक जीवित रहते हैं। नागमणि मिल जाने के बाद उस खास सांप को सब नागराज पुकारने लगते हैं और वह सांपो का राजा हो जाता है।

नागमणि कैसी दिखती है –

ध्यान दें कि नागमणि आपको देखने में बहुत छोटी से एक मोती की तरह होती है। वहीं, कुछ लोगों का यह कहना है कि नागमणि किसी चावल के एक दाने के समान होती है और कुछ कहते हैं की नागमणि एक बड़े मोती की तरह होती है। अगर ध्यान दिया जाए, तो दोनों बात कुछ हद तक एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और वह भी इसलिए क्योंकि जैसे-जैसे नागमणि की उमर बढ़ती जाएगी… वैसे वैसे ही उसका आकार भी बढ़ता चला जाएगा। आप सोच सकते हैं कि नागमणि में इतनी ज्यादा चमक होती है कि अंधेरे में भी पूरी रोशनी देती है।

नागमणि की उम्र के साथ बढ़ती है रोशनी –

बता दें कि जैसे-जैसे नागमणि की उमर बढ़ती जाएगी… उसकी रोशनी भी साथ में बढ़ती चली जाएगी। नागमणि को लेकर लोगों के बीच भी काफी कुछ सुनने को मिलता है। लोगों का मानना है कि जब स्वाती नक्षत्र में बारिश होती है तब जो बारिश की कुछ बूंदे सांप के मूंह मे जाती है वह मणि का रूप ले लेती हैं। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि जब स्वाती नक्षत्र में औश पड़ती है तो उसी पानी से ही नागमणि बनती है।

नागमणि का सच –

सच तो यह है कि नागमणि होती है और यह मणि उन नागों के पास होती है, जो बुढ़ें होते हैं या फिर रेंग नहीं पाते हैं।

दरअसल, कुछ नाग ऐसे सांपो को खा जाते हैं, जिनको मारने के लिए उन्हें अपने जहर की ज़रूरत ही नहीं होती। ऐसे में सांप में मौजूद जहर नाग के ही सिर मे जमा होता चला जाता है। फिर जहर सुख कर काफी ठोश  बन जाता है या फिर यूं कहें की सुख कर पत्थर के सामान हो जाता है और जहर की वजह से उसमें काफी चमक भी होती है। हालांकि उस पत्थर के निकलने के बाद ही नाग की मौत हो जाती है। गौरतलब है कि ऐसे नाग बहुत कम ही होते हैं जो बिना अपने जहर के इस्तेमाल से अपने शिकार को खा सकें।

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