Home Uncategorized संजीवनी बूटी के लिए यही पहाड़ उठाकर लाए थे हनुमान जी, आज...

संजीवनी बूटी के लिए यही पहाड़ उठाकर लाए थे हनुमान जी, आज भी है इसपर भगवान शिव के पैरों के निशान

यह दुनिया बहुत बड़ी है और यहाँ पर रहस्यों की कोई कमी नहीं है। आज भी इस दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं, जीके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आज भी इस वैज्ञानिक युग में कई ऐसी चीज़ें हैं, जिनके रहस्यों के बारे में पता नहीं चल पाया है। भारत में ऐसी कई जगहें हैं, जिनके बारे में आज भी लोग जानने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कुछ भी पता नहीं चल पा रहा है। आज हम आपको एक ऐसी ही जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका सम्बंध आज से नहीं बल्कि रामायण काल से है।

पहाड़ पर बना है भगवान शिव के पैरों का निशान

आपकी जानकारी के लिए बता दें हम जिस स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं, वह भारत में ना बल्कि श्रीलंका में स्थित है। इस जगह को एडम्स पीक या श्रीपदा के नाम से जाना जाता है। यह पहाड़ रामायण काल से स्थित है। इस पहाड़ को लेकर कई धर्मों में अनेक मान्यताएँ हैं। लेकिन इस पहाड़ का हिंदू धर्म में सम्बंध बहुत ही गहरा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस पहाड़ पर एक मंदिर बना हुआ है, जिसमें एक पैर का निशान है। लोगों का मानना है कि यह पैर का निशान किसी और का नहीं बल्कि भगवान शिव का है।

यह पहाड़ रतनपुर जिले में स्थित है। यह पूरा क्षेत्र समनाला माउंटेन रेंज का हिस्सा है। यह पहाड़ घने जंगलों में स्थित है। स्थानीय लोगों के बीच पहाड़ रहुमाशाला कांडा के नाम से जाना जाता है। इस पहाड़ पर जो मंदिर बना हुआ है, इसमें भगवान शिव के पैरों के निशान बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि मनुष्यों को अपना दिव्य प्रकाश देने के लिए भगवान शिव यही प्रकट हुए थे। इसी वजह से यहाँ उनके पैरों के निशान बने हुए हैं। इस स्थान को सिवानोलीपदम या शिव का प्रकाश भी कहा जाता है।

युद्ध के दौरान मेघनाद के वाण से घायल हो गए थे लक्ष्मण:

लगभग 2200 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस पहाड़ की एक अन्य ख़ासियत भी है। इस पहाड़ में कई क़ीमती पत्थरों का भंडार भी है। कहा जाता है कि रामायण के दौरान जब लक्ष्मण मेघनाद के वाण से घायल हो गए थे तो उन्हें बचाने के लिए सजीवनी बूटी की ज़रूरत थी। संजीवनी बूटी की तलाश के लिए हनुमान जी को भेजा गया। बस उन्हें बताया गया था कि संजीवनी बूटी हिमालय पर्वत पर है। संजीवनी बूटी की तलाश करते समय हनुमान जी को कुछ समझ में नहीं आया।

हर साल लगा रहता है पर्यटकों का आना जाना:

समझ में ना आने की वजह से उन्होंने पूरे पहाड़ को ही ले जाना उचित समझा। उन्होंने पूरा पहाड़ ही उठा लिया और उसे लेकर लंका पहुँचे। लक्ष्मण के इलाज के बाद पहाड़ को वहीं छोड़ दिया गया। इस धार्मिक वजह से अलावा यह पहाड़ इसलिए भी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है क्योंकि यहाँ से एशिया का सबसे अच्छा सूर्योदय देखा जा सकता है। इसी वजह से यहाँ पर पूरे साल पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। इस पहाड़ पर जो प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलता है, वह वाक़ई अद्भुत है।