दुश्मन तो क्या खुद मृत्यु भी नहीं पहुंचा सकती नुक्सान,जिस घर के मुख्य दरवाजे पर बना हो ये एक निशान

शास्त्रों के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर शुभ धार्मिक चिन्ह बनाने से सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इसके अतिरिक्त वास्तु के अनुसार कुछ ऐसे चिन्हों का उल्लेख किया गया है जो घर की सारी चिंता से मुक्ति दिलाने में सहायता करते हैं। घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक, ॐ, श्रीगणेश, शुभ-लाभ आदि चिन्हों को बनाने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है| है। और नकारात्मक उर्जा प्रवेश नही कर पाती| दोस्तों आपका धनवान न होना या घर पर धन का न टिकना इन सबका मुख्य कारण वास्तु एवं ज्योतिष दोनों के अनुसार घर का मुख्य दरवाजा बताया है|

दोस्तों जब हम दरवाजा खोलते है तो न केवल हम और हमारे परिवार के सदस्य घर पर प्रवेश करते है बल्कि हमारे साथ कई उर्जाये भी घर में प्रवेश करती है कुछ उर्जाये इतनी ज्यादा शक्तिशाली एवं नकरात्मक होती है जिससे न केवल हमे धन हानि होती है बल्कि ये हमारे लिए परेशानिया भी खड़ी कर देती है|

अक्सर ये देखा जाता है की आपके घर में खुशिया टिकती ही नही, आपके बच्चो का पढ़ाई में मन न लगना, घर में सदस्यों का बार बार बीमार होना, व्यपार आदि में नुक्सान होना, नौकरी में प्रमोशन न मिलना यह सब अशुभ संकेत मान जाता है| अगर आप अपने घर को बुरी ऊर्जा से बचाना चाहते है तथा अपने परिवार में सुख सम्पत्ति एवं माँ लक्ष्मी का कृपा चाहते है तो वास्तु एवं ज्योतिष दोनों ही यह कहते है की अपने दरवाजा में ही उर्जाओ को आप वास्तु प्रतीकों के माध्यम से रोक लेते है|

शास्त्रों के अनुसार देखा जाये तो त्रिशूल ॐ और स्वस्तिक,हिन्दू संस्तृति के यह तीन शुभ और प्रेरणादायी प्रतिक है.जो आत्मविश्वास और एकाग्रता को बढाने का काम करते है.सूर्य ऊर्जा के गोले के मध्यभाग में यह प्रतीक रखे जाते है. शिव और शक्ति की ऊर्जा स्रोत के उसमे दर्शन होते है.श्रद्धा और विश्वास के साथ दर्शन करने से व्यक्ति की प्रगति होती है.वास्तुदोष निवारण में इस का उपयोग करने से आसुरी शक्तिया दूर रहती है

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दोस्तों आप त्रिशक्ति के बारे में शायद जानते होंगे अर्थात त्रिशूल ॐ और स्वास्तिक. इन तीनो चिन्ह का हिन्दू धर्म में अत्यधिक महत्व है और जहा भी यह तीनो चीज़ एक साथ होती है समझो उस घर में बरकत ही बरकत होती है|हमारे शास्त्रो में स्वस्तिक चिन्हों की बहुत अहमियत होती है.| जब भी घर में कोई शुभ काम होता है तो सबसे पहले स्वस्तिक चिन्ह बनाया जाता है। स्वस्तिक चिन्ह न सिर्फ शुभ संकेत होता है बल्कि सभी मंगल कार्यो से पहले इसकी पूजा अर्चना की जाती है|

स्वस्तिक चिन्ह वास्तु में भी अहम होता है पूजा से पहले इसका निर्माण किया जाता है। स्वस्तिक चिन्ह घर में सुख समृद्धि एवं धन में वृद्धि करता है।आपने देखा होगा कि लोग पूजा स्थान में अथवा किसी शुभ अवसर पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि स्वास्तिक चिन्ह शुभ और लाभ में वृद्धि करने वाला होता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार स्वास्तिक का संबंध असल में वास्तु से है। इसकी बनावट ऐसी होती है कि यह हर दिशा में एक जैसा दिखता है। अपनी बनावट की इसी खूबी के कारण यह घर में मौजूद हर प्रकार के वास्तुदोष को कम करने में सहायक होता है।

शास्त्रों में यह बताया गया है की स्वास्तीक चिन्ह घर में आने वाली सभी नकरात्मक ऊर्जा को रोकता है और वही ॐ का चिन्ह काली शक्तियाँ बुरी ऊर्जा यहां तक की मृत्यु से भी विजय प्राप्त करने वाला माना जाता है| और वही त्रिशूल भगवान शिव का शस्त्र है जहा त्रिशूल रहता है वहा व्यक्ति के कर्म विचार और स्वभाव ये तीनो ही सकरात्मक हो जाते है|

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